Friday, May 11, 2012


                         अंधेर  नगरी  चौपट राजा



'यह मकान  तेरा है ?'
'होऊ साब' 
'तेरा नाम का है ?
'घोड़ बोले , साब'
 'इस मकान के ऊपर वाले दो माले गिराने है. हम कारपोरेसन  वाले है. नया नियम बना है'.
 ' क्यों साब,  का हो गया '
 'आज-कल क्राईम  बहुत बढ़ गया है. लड़के - लड़कियां  ऊपर के माले  से कूद कर आत्म हत्या  कर रहे हैं, बीवियों को ऊपर ले जा कर नीचे धकेल देते है,  घरेलू   नौकर नौकरानियो को भी इस तरह मार रहे है'

'ऐसा क्या ?'

'कानपुर, नाकपुर,बालपुर, इकबालपुर सब जगह क्राइम  हो रहा है. इसलिए  सुपर साहब ने यह  नियम बनाया है कि एक माले के ऊपर के सभी माले गिरा  दिए जाये'

 पर सब, मैंने तो  अभी-अभी ये ये ऊपर वाला मकान बनवाया है.कारपोरेसन से  पास करवाया है.  आपके आदमियों  ने इसे देख कर पास भी कर दिया था.साब, अब तोड़ ने   पर मेरा बहुत नुक्सान होगा '

 'उस से कोई फरक नहीं  पड़ता,  सुपर   साहब का हुकम है. तामील करना ही  है.  तुम अगर नहीं तोड़ोगे तो हम बुलडोज़र से तोड़वा   देंगे.'

 ' साब दया करो, गली के किनारे वाले चौधरी ने तो हवेली खड़ी कर  रखी है... क्या उनको  भी तोडना पड़ेगा  साब ?

'नहीं, उन्होंने  हरे रंग की ईंटो का इस्तेमाल किया था . जिन लोगों ने रंगीन ईंटो से माकन बना रखा है, वे चाहे जीतनी भी  ऊंची मंजिले बना ले  कोई क्राईम  हो ही नहीं सकता. उनका     मकान  नहीं  टूटेगा.

'रंगीन ईंटे  बहुत  महँगी है साब,  हम ऊपर से रंग कर लेंगे साब ,

'नहीं, ये नियम के खिलाफ है '

'साब कुछ  ले दे कर माफ़ कर दो, हम गरीब लोग हैं, दया दिखाओ साब.'

'ऐसा कुछ  नहीं होगा. हमारा सुपर साब वैसा कुछ नहीं होने देंते है'.

 पर साब, ये  सुपर साब के पहले वाले साब ने तो , कहते हैं, काफी कुछ होने दिया है.'

 ' जजमेंट रिजर्व है ... जब होगा तब होगा.'