Friday, June 22, 2012


                                                 
  आम आदमी 



मैं कवि नहीं  श्रोता हूँ ,
कविता पर खुश होता   हूँ ,   तालियाँ  बजाता  हूँ ;
मेरे पास सुर नहीं है, गा नहीं सकता, 
पर सुर और संगीत मेरे ह्रदय के तारों को झंकृत कर देती है. 
 गाने का आनंद  ले  लेता हूँ ;
 कहानियाँ   मुझे स्वप्न नगरी की सैर करा देती है .
  चित्रों के रंग मेरी आँखों से होते हुए  दिल में उतर जाते है ; 
पर रंगों की कूची पकड़ना तक नहीं  आता.
 मैं उसका पारखी भी नहीं हूँ.
 मेरा स्थान मंच पर कभी नहीं  होता / है,
क्योंकि   मैं श्रोता  हूँ ,   दर्शक हूँ ,  आम आदमी  हूँ ;
पर मेरी जरूरत तो सभी को है ना  !
मैं न  रहूँ  तो इनका सबका क्या महत्व  ?
इन लोगों का क्या महत्व  ?

Thursday, May 31, 2012

                                      Rageela Insaan


'आप किस रंग की  टोपी पहनते हो  ?'
 'नहीं, मैं नहीं पहनता'  
'केरलम आने के पहले ?'
'तब भी नहीं पहना करता था l '
'कालेज में या स्कूल में ? '
'तब भी नहीं '.
 'तब तो आपको सभी टोपीवाले सताते होंगे... सारे आपके दुश्मन  होंगे ? कभी किसी ने  आपका साथ नहीं दिया होगा ?'
 सभी के साथ मेरी दोस्ती थी और दोस्ती है ,   मैंने किसी से दुश्मनी नहीं  की l
 'ऐसा कैसे हो सकता है ?  लाल टोपी वालों में और हरे वालों में तो कभी नहीं पटी l  आरेंज वाले तो सफ़ेद वालों के दुश्मन हैं केरलम  में हरकोई टोपी पहनता है. इसके बिना कोईं काम नहीं चलता ; चाहे वो नेता हो या  अभिनेता, मजदूर हो या मालिक, व्यापारी हो या दलाल  स्कूल , कोलेज या कार्य स्थल सब जगह सब लोग टोपी पहने होते हैं. टोपी का रंग पहनने  वाला चुन लेता है .अगर आपका किसी से कोई तकरार हो, कभी कोई  Queue  तोड़ कर आपसे आगे जाये , आपकी गाडी ठुक   जाये, इसी तरह की बातों में आपके साथ हाँ मिलाने वाला  टोपी वाला ही होता है. गलती किसी की हो, टोपीवाला  आपका साथ देता है. 

Friday, May 11, 2012


                         अंधेर  नगरी  चौपट राजा



'यह मकान  तेरा है ?'
'होऊ साब' 
'तेरा नाम का है ?
'घोड़ बोले , साब'
 'इस मकान के ऊपर वाले दो माले गिराने है. हम कारपोरेसन  वाले है. नया नियम बना है'.
 ' क्यों साब,  का हो गया '
 'आज-कल क्राईम  बहुत बढ़ गया है. लड़के - लड़कियां  ऊपर के माले  से कूद कर आत्म हत्या  कर रहे हैं, बीवियों को ऊपर ले जा कर नीचे धकेल देते है,  घरेलू   नौकर नौकरानियो को भी इस तरह मार रहे है'

'ऐसा क्या ?'

'कानपुर, नाकपुर,बालपुर, इकबालपुर सब जगह क्राइम  हो रहा है. इसलिए  सुपर साहब ने यह  नियम बनाया है कि एक माले के ऊपर के सभी माले गिरा  दिए जाये'

 पर सब, मैंने तो  अभी-अभी ये ये ऊपर वाला मकान बनवाया है.कारपोरेसन से  पास करवाया है.  आपके आदमियों  ने इसे देख कर पास भी कर दिया था.साब, अब तोड़ ने   पर मेरा बहुत नुक्सान होगा '

 'उस से कोई फरक नहीं  पड़ता,  सुपर   साहब का हुकम है. तामील करना ही  है.  तुम अगर नहीं तोड़ोगे तो हम बुलडोज़र से तोड़वा   देंगे.'

 ' साब दया करो, गली के किनारे वाले चौधरी ने तो हवेली खड़ी कर  रखी है... क्या उनको  भी तोडना पड़ेगा  साब ?

'नहीं, उन्होंने  हरे रंग की ईंटो का इस्तेमाल किया था . जिन लोगों ने रंगीन ईंटो से माकन बना रखा है, वे चाहे जीतनी भी  ऊंची मंजिले बना ले  कोई क्राईम  हो ही नहीं सकता. उनका     मकान  नहीं  टूटेगा.

'रंगीन ईंटे  बहुत  महँगी है साब,  हम ऊपर से रंग कर लेंगे साब ,

'नहीं, ये नियम के खिलाफ है '

'साब कुछ  ले दे कर माफ़ कर दो, हम गरीब लोग हैं, दया दिखाओ साब.'

'ऐसा कुछ  नहीं होगा. हमारा सुपर साब वैसा कुछ नहीं होने देंते है'.

 पर साब, ये  सुपर साब के पहले वाले साब ने तो , कहते हैं, काफी कुछ होने दिया है.'

 ' जजमेंट रिजर्व है ... जब होगा तब होगा.'