Thursday, August 2, 2012

                     कविता 


कविता नारा है जो आग उगलती है. 

कविता मीठी लोरी है, बच्चों को सुलाती है.


कविता प्रणय गीत है, प्रेम जगाती है.


वीरों की रणभेरी है, हुंकार है,


जय-जयकार है जेता की. 


कविता दुखियों के आंसू हैं

प्रताड़ितों की पुकार है, मरहम है .


कोई निर्मित नहीं करता


खुद उग पड़ता है उपजाऊ ह्रदय में


बस एक ही पन्ने में सिमट कर---


कविता मेरी बेटी है , मेरी प्यारी है !